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के.एम.एस. शाखा किरंदुल द्वारा मनाया गया भारतीय मजदूर संघ का स्थापना दिवस

के.एम.एस. शाखा किरंदुल द्वारा मनाया गया भारतीय मजदूर संघ का स्थापना दिवस

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BASANT SACHDEV
वरिष्ठ संवाददाता
59 दिन पहले 235 मिनट पढ़ें
के.एम.एस. शाखा किरंदुल द्वारा मनाया गया भारतीय मजदूर संघ का स्थापना दिवस

किरंदुल. खदान मजदूर संघ शाखा किरंदुल द्वारा विश्व के सबसे वृहद श्रम संगठन भारतीय मजदूर संघ का 72वां स्थापना दिवस गरिमामयी समारोह आयोजित कर मनाया गया। विदित हो कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सर संघ चालक परम पूज्य गुरूजी के वैचारिक कल्पना एवं निर्देशानुसार संघ के वरिष्ठ प्रचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी द्वारा 23 जुलाई 1955 को आजादी के प्रणेता बाल गंगाधर तिलक जी तथा महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद जी की जयंती पर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की गई थी। स्थापना के समय से ही बीएमएस का उद्देश्य राष्ट्रहित सर्वोपरि का रहा है। स्थापना दिवस के गरिमामयी आयोजन का शुभारम्भ माँ भारती एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के तैल चित्रों के समक्ष भारतीय मजदूर संघ के जिले के प्रभारी रूद्र कुमार ताती, किरंदुल भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय सोढ़ी, महामंत्री विक्रम नाहक, वरिष्ठ नेता रविन्द्र सोनी, अतुल सिँह, नगरपालिका परिषद के एल्डरमेन संजू दास, खदान मजदूर संघ शाखा किरंदुल के अध्यक्ष बी. दिल्ली राव, वरिष्ठ सदस्य बसंत पासी, उपेंद्रनाथ त्रिपाठी, दानेश्वर जोशी, बचेली शाखा के अध्यक्ष पूरन जायसवाल, मातृशक्तियों के कर कमलों से दीप प्रज्जवलन कर ध्वजारोहण किया गया। यूनियन के पदाधिकारी राजेंद्र यादव द्वारा जानकारी दी गई कि राष्ट्रहित, उद्योगहित, श्रमिक हित के ध्येय वाक्य के साथ कार्य करने वाली ट्रेड यूनियन बीएमएस का हमेशा से यह नारा रहा है— "देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम"। संकट के समय उन्होंने हमेशा संगठनात्मक हितों से ऊपर राष्ट्रीय कर्तव्य को प्राथमिकता दी है और अपनी बातों को पूरा करके चरितार्थ भी किया है भारतीय मजदूर संघ ने। पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय देश की आयुध कारखानों में उत्पादन को बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखा था। पाकिस्तान के साथ युद्ध (विशेषकर 1965 और 1971 के युद्ध) और 1962 में चीन के आक्रमण के समय, बीएमएस ने देश के विभिन्न मजदूर संगठनों को मिलाकर एक विशेष मंच 'राष्ट्रीय मजदूर मोर्चा' का गठन किया था। इस मोर्चे के माध्यम से बीएमएस ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले सिविलियन कर्मचारियों और मजदूरों को एकजुट किया। संगठन ने स्पष्ट नीति अपनाई कि राष्ट्रीय संकट के इस समय में कोई भी हड़ताल या विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। देश के जवानों को हथियारों और गोला-बारूद की कमी न हो, इसके लिए मजदूरों ने बिना थके दिन-रात (अतिरिक्त शिफ्टों में) काम किया ताकि सेना को युद्ध सामग्री की आपूर्ति लगातार मिलती रहे। इसी युद्धकालीन राष्ट्रभक्ति और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों (जैसे कानपुर और अन्य स्थानों) में सफल कार्यप्रणाली के बाद, रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बीएमएस की एक विशेष रक्षा इकाई 'भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ' का आधिकारिक गठन हुआ।

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