पीएम फसल बीमा में 'मौन सहमति' की प्रक्रिया पर उठे सवाल, किसानों में असमंजस
पीएम फसल बीमा में 'मौन सहमति' की प्रक्रिया पर उठे सवाल, किसानों में असमंजस

आरंग। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026-27 के तहत अपनाई जा रही 'मौन सहमति' (Silent Consent) की प्रक्रिया को लेकर किसानों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित, आरंग द्वारा जारी सूचना के अनुसार जो किसान योजना का लाभ नहीं लेना चाहते, उन्हें समिति कार्यालय में उपस्थित होकर आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल नंबर के साथ असहमति (ऑप्ट-आउट) फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि तक ऐसा नहीं करने पर उनकी सहमति मानते हुए फसल बीमा स्वतः कर दिया जाएगा। इसी प्रक्रिया को लेकर कई किसानों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे किसान भी हैं जो सूचना के अभाव, दूरी, व्यस्तता या अन्य कारणों से समय पर समिति कार्यालय नहीं पहुंच पाते। ऐसे में बिना अलग से सहमति दिए केवल असहमति फॉर्म जमा नहीं करने पर बीमा स्वतः किए जाने की व्यवस्था को लेकर भ्रम और चिंता की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति आरंग के प्रबंधक संतोष साहू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पूरी तरह ऐच्छिक (वैकल्पिक) है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जो किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहते, उनके लिए असहमति फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया है। यह प्रक्रिया 13 जुलाई से 31 जुलाई तक सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि आरंग समिति में करीब 900 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से अब तक 15 किसानों ने फसल बीमा नहीं कराने के लिए असहमति फॉर्म जमा किया है। किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के लिए गांव-गांव मुनादी कराई जा रही है और अन्य माध्यमों से भी सूचना दी जा रही है, ताकि कोई भी किसान जानकारी के अभाव में प्रभावित न हो। फिलहाल, किसानों का कहना है कि योजना की प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट एवं व्यापक रूप से प्रचारित किया जाना चाहिए, जिससे प्रत्येक किसान अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय लेकर योजना में शामिल होने या नहीं होने का विकल्प आसानी से चुन सके।



