सब्जियों के ग्राफ्टेड पौध उत्पादन के गुर सीख रहे किसान
सब्जियों के ग्राफ्टेड पौध उत्पादन के गुर सीख रहे किसान

उत्तर बस्तर कांकेर 20 अगस्त 2026/ जिले में सब्जियों की खेती में प्रमुख रूप से किसान बैगन एवं टमाटर की खेती करते हैं, बैंगन की खेती में प्रमुख रूप से उकठा एवं सूत्रकृमि रोग लगने के कारण किसानों को नुकसान होता है। साथ ही बरसात में होने वाले जलभराव की समस्या एवं गर्मी में अत्यधिक तापमान से होने वाले फसल क्षति से कृषकों को भारी नुकसान होता है। इस प्रकार की समस्या को दूर करने के लिए बैगन एवं टमाटर के ग्राफ्टेड पौधों की आवश्यकता होती है। ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में अधिक मजबूत, रोग प्रतिरोधी तथा अधिक उत्पादन देने वाले होते हैं। वर्तमान में कांकेर जिले के सब्जी उत्पादक रायपुर या अन्य दूरस्थ नर्सरियों से ग्राफ्टेड टमाटर एवं बैंगन के पौध खरीदकर लाते हैं, जिससे उन्हें पौधे की कीमत (10-12 रूपये प्रति पौधा), परिवहन व्यय एवं समय अधिक लगता है और उत्पादन लागत बढ़ता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर में ग्राफ्टिंग तकनीक विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन 21 अगस्त तक किया जा रहा है। केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. गरिमा दीवान ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रायोगिक तौर पर ग्राफ्टिंग की तकनीक को सिखाया, साथ ही ग्राफ्टिंग के बाद पौधे की देखभाल की विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में किसानों को कम लागत में हीलिंग चौबर तैयार कर स्थानीय स्तर पर ग्राफ्टेड पौधे तैयार करने की तकनीक भी सिखाई जा रही है। ग्राफ्टेड पौधे की कीमत एवं मांग अधिक होती है जिससे छोटे किसान भी व्यावसायिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण ग्राफ्टेड पौध उत्पादन कर सफल उद्यमी बन सकते हैं। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बीरबल साहू द्वारा किसानों को ग्राफ्टेड पौधों की उपयोगिता एवं संभावित उद्यमिता विकास की जानकारी दी गई। केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एन. एच. तायड़े, श्री उपेन्द्र नाग एवं डॉ सी. एल. ठाकुर ने किसानों को टमाटर एवं बैगन की उत्पादन तकनीक, रोग प्रबंधन एवं यंत्रीकरण की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में स्वयंसेवी संस्थान के कार्यकर्ताओं सहित नरहरपुर विकासखण्ड के विभिन्न ग्रामों के 30 किसानों ने भाग लिया।



