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स्मार्ट सिटी मिशन में ₹1,764 करोड़ के कथित 100% व्यय पर केंद्रीय RTI से बड़ा पर्दाफाश

भुगतान 100% दर्शाया, पर भौतिक प्रगति और क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट छुपाने पर घिरे अफसर; ठेकेदारों पर 'शून्य' पेनाल्टी की जांच हेतु शासन को विधिक दिया ज्ञापन - मनोज सिंह ठाकुर

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BASANT SACHDEV
वरिष्ठ संवाददाता
19 घंटे पहले 159 मिनट पढ़ें
स्मार्ट सिटी मिशन में ₹1,764 करोड़ के कथित 100% व्यय पर केंद्रीय RTI से बड़ा पर्दाफाश

रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन में हुए वित्तीय व प्रशासनिक खेल की वास्तविक स्थिति उजागर हुई है। अधिवक्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा इस संदर्भ में राज्य शासन, मुख्य सचिव एवं स्मार्ट सिटी एसपीवी (SPV) प्रशासन को औपचारिक विधिक ज्ञापन प्रेषित कर माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच एवं सुसंगत विधिक कार्रवाई की मांग की गई है। 1. 50:50 मैचिंग शेयर का गणित — ₹1,764 करोड़ का खेल: स्मार्ट सिटी मिशन केंद्र व राज्य सरकार की 50:50 हिस्सेदारी वाली योजना है। केंद्र के पत्र के अनुसार: रायपुर: केंद्र ने ₹453 करोड़ दिए और शत-प्रतिशत (₹453 करोड़) व्यय दर्शाया। राज्य का बराबर 50% शेयर मिलाकर रायपुर में कुल ₹906 करोड़ का व्यय कागजों में दिखाया गया है। बिलासपुर: केंद्र ने ₹429 करोड़ दिए और ₹411 करोड़ खर्च दर्शाए। राज्य का शेयर मिलाकर बिलासपुर में ₹858 करोड़ (व्यय: ₹822 करोड़) का फंड लगा। कुल व्यय: दोनों शहरों में कुल ₹1,764 करोड़ की भारी-भरकम राशि में से ₹1,728 करोड़ का 100% कागजी खर्च दिखा दिया गया है। 2. आरटीआई का सबसे बड़ा खुलासा: 100% भुगतान हुआ, पर काम की स्थिति व ऑडिट रिपोर्ट गायब! आरटीआई के आधिकारिक पन्नों में सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक ओर केंद्र सरकार कागजों में पूरे ₹453 करोड़ का 100% भुगतान व उपयोगिता दर्शा रही है, लेकिन जब आरटीआई के बिंदु क्र. 2 और 5 में योजनाओं की वास्तविक भौतिक प्रगति (Physical Status) और थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई, तो केंद्र ने हाथ खड़े कर दिए कि यह रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है! बड़ा सवाल यह है कि यदि काम का भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण केंद्र के पास था ही नहीं, तो 100% फंड यूटिलाइजेशन का प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी हुआ? यह साबित करता है कि बिना काम पूरा हुए कागजों में फर्जी यूसी (UC) बनाकर पूरा फंड समाप्त दिखाया गया। 3. अनुबंध की समय-सीमा, मीडिया के खुलासे और 'शून्य पेनाल्टी' का सच: शारदा चौक से तात्यापारा मार्ग (रायपुर): 2018-19 में प्रारंभ अनुबंध की मियाद 2021 में समाप्त हो चुकी थी, लेकिन कार्य 2026 तक अधूरा रहा। दैनिक भास्कर (14 जून 2023) ने "कागजों में दौड़ती रही 80 फीट सड़क, 5 साल में एक इंच चौड़ीकरण नहीं" तथा पत्रिका (22 सितंबर 2024) ने "स्मार्ट सिटी का फ्लॉप शो: 6 साल बाद भी अधिग्रहण अधूरा" प्रकाशित किया था। 24x7 प्रेशराइज्ड वाटर सप्लाई स्कीम: मोतीबाग कमांड एरिया (रमण मंदिर वार्ड, गंज, बैरन बाजार, पुरानी बस्ती) का अनुबंध 2020-21 में 18 माह (मध्य 2022 समाप्ति) हेतु हुआ था। मियाद खत्म होने के वर्षों बाद तक काम लटका रहा। नईदुनिया (28 मई 2023) ने "24 घंटे पानी का दावा हवा-हवाई, स्मार्ट पाइपलाइन से सप्लाई हुआ गंदा मटमैला पानी" तथा दैनिक भास्कर (11 नवंबर 2023) ने सड़कों की खोदाई व बदहाली को सचित्र उजागर किया। कुशालपुर–संतोषी नगर–सुंदर नगर ड्रेनेज: 2021-22 में निष्पादित अनुबंध की मियाद बीतने के बाद भी ड्रेनेज अधूरा रहने पर दैनिक भास्कर (18 जुलाई 2023) ने "स्मार्ट ड्रेनेज का सच: 200 से अधिक घरों में घुसा नाली का पानी" एवं पत्रिका (08 अगस्त 2024) ने जलभराव की तस्वीरें छापी थीं। बिलासपुर (अरपा रिवरफ्रंट व मंगला एसटीपी): 2021-22 का अनुबंध 2023 में समाप्त होने के बाद भी कार्य अधूरा रहने पर दैनिक भास्कर (16 सितंबर 2023) एवं पत्रिका (18 अक्टूबर 2024) ने खुलासा किया था कि स्वयं नगर निगम ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि काम सिर्फ 65% पूरा हुआ था। 4. अनुबंध समाप्ति से 31 मार्च 2025 तक कोई कार्रवाई नहीं: मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि स्मार्ट सिटी मिशन 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका है। मूल अनुबंधों की अवधि 2021 से 2023 के बीच ही समाप्त हो चुकी थी, किंतु 31 मार्च 2025 तक मिशन के पूरे कार्यकाल में लेटलतीफी करने वाले ठेकेदारों पर पेनाल्टी और नोटिस की संख्या "Nil" (शून्य) दर्ज रही! अनुबंध के लिक्विडेटेड डैमेज (LD) नियम की खुली अनदेखी कर ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। प्रमुख मांगें: उच्चस्तरीय न्यायिक अथवा EOW जांच: स्मार्ट सिटी मिशन अंतर्गत व्यय हुए संपूर्ण ₹1,764 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्रों, टेंडरों एवं बिना भौतिक प्रगति व क्वालिटी ऑडिट देखे 100% भुगतान करने की जांच माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए अथवा प्रकरण सीधे राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाए।दोषियों पर यथोचित विधिक कार्रवाई: नियमों का खुला उल्लंघन कर पेनाल्टी शून्य करने वाले तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, प्राइवेट कंसल्टेंट्स (PMC) एवं निर्माण एजेंसियों पर विधि अनुसार जवाबदेही तय कर कठोर विधिक कार्रवाई की जाए। क्वालिटी रिपोर्ट सार्वजनिक हो: दोनों शहरों के सभी प्रोजेक्ट्स के 'थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट' एवं भौतिक पूर्णता प्रमाण-पत्र सार्वजनिक पटल पर रखे जाएं। समानांतर विधिक कार्रवाई: शासन-प्रशासन को जांच व कार्रवाई हेतु ज्ञापन सौंपने के साथ-साथ, जनहित में इस विषय पर माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष भी यथोचित विधिक कार्रवाई प्रारंभ करने हेतु समुचित कदम उठाए जाएंगे।

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