हिड़मा नही बल्कि असली हीरो तो हमारे जवान हैै: प्रियंका
नक्सलवाद की समाप्ति में मीडिया की भूमिका अह्म: डीआईजी सुकमा में नारद जयंति के अवसर पर हुआ पत्रकारों का सम्मान

सुकमा बस्तर के सामने कई चुनौतियां हैं। हमें विभाजनकारी शक्तियों को पहचानकर उनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आज कई पत्रकार पूवर्ती गांव जाकर खूंखार नक्सली हिड़मा और उसके परिवार को ग्लोरीफाई कर रहे हैं, लेकिन कितने पत्रकार बस्तर में शहीद हुए पुलिस या सीआरपीएफ जवानों के घर तक पहुंचे। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने आयोजित कार्यक्रम में कही। शबरी माता जनकल्याण सेवा समिति सुकमा द्वारा नारद जयंति के अवसर पर पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस दौरान सुकमा जिले के दो दर्जन से ज्यादा पत्रकारों का विशेष सम्मान किया गया। जनसंर्पक अधिकारी सागर वारे ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद सभी पत्रकारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। आप सभी अपनी लेखनी से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर कर लोगों को जागरूक करें। इन्हे शिक्षा से जोड़ें। कार्यक्रम में अघ्यक्षीय उदबोधन चमन लाल साहु ने किया तथा आभार डा. अनमय बिंदवई ने व्यक्त किया तथा कार्यक्रम का संचालन लीलाधर राठी ने किया। बाक्स...... मीडिया से है समाज को उम्मीद: भदौरिया आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा कि समाज के सामने खबरों की प्रस्तुति कैसे करें ये सबसे ज्यादा महत्तवपूर्ण है। आज समाज को छोटे से लेकर बड़े मामले में मीडिया से उम्मीद बनी रहती है। पूर्व में नारद मुनि जी मुखबीरी कर खबरों का अदान प्रदान किया करते थे आज पत्रकार साथी भी समस्याओं व विचारों का अदान प्रदान कर निदान कराने में सहयोग करते है। बाक्स..... पत्रकारों पर भरोसा आज भी जीवित: राजेंद्र श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष पी. राजेन्द्र ने कहा सुकमा जिले में पत्रकारिकता करना कठिन है विषम परिस्थितियों में जिले के पत्रकारों ने समाचार खोजकर खबर बनाते थे नक्सली क्षेत्र होने के बाद भी सुकमा के पत्रकार अंदर गांव में खबर खोजने जाते थे। नक्सली क्षेत्र होने की वजह से पत्रकार को दोनों तरफ बैलेंस बनाकर समाचार बनाना पड़ता था। हमारे पत्रकारों ने निडर होकर समाचार बनाया, हमने समाज हित में काम किया। सुकमा को सुखमय सुकमा बनाने के लिए सभी लोग मिलकर काम किया। पत्रकार ,शिक्षक, पुलिस के जवान सीआरपीएफ,डीआरजी, कोबरा, सीसीएफ सभी के सहयोग से आज सुकमा छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हुआ। सुकमा के विकास के लिए शहीद हुए जवानों को नमन करता हूं। समाज विकास के लिए गांव की विकास क लिए हमारे पत्रकार काम करते हैं और करते रहेंगे। पत्रकार के ऊपर सबकी नजर टिके रहता और छोटे से छोटे काम करवाने पत्रकारों के ऊपर भरोसा करते हैं। बाक्स...... पत्रकार समाज और लोकतंत्र के सशक्त स्तंभ: दीपिका शोरी अधिवक्ता एवं महिला आयोग की सदस्य दीपिका शोरी ने अपने उदबोधन में कहा कि शबरी माता जनकल्याण सेवा समिति, जिला सुकमा द्वारा आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में शामिल होकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। जिले के पत्रकार साथियों का सम्मान करना मेरे लिए गौरव का विषय है। पत्रकार समाज और लोकतंत्र के सशक्त स्तंभ हैं। जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए पत्रकार निरंतर समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुझे भी पत्रकारिता से जुड़े अपने पिछले कई वर्षों के अनुभव पत्रकार साथियों के बीच साझा करने का अवसर मिला। सुश्री दीपिका ने कहा कि देवर्षि नारद को आद्य पत्रकार के रूप में स्मरण करते हुए हम सभी को सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। मैं सभी पत्रकार साथियों को शुभकामनाएं देती हूं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं। बाक्स...... बस्तर के पत्रकारों ने अपनों को भी खोया: प्रियंका मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने कहा कि देवर्षि नारद से हमें चार बातें सीखनी चाहिए। सबसे पहले हमारी पत्रकारिता के केंद्र में लोकमंगल की भावना हो। दूसरी महत्वपूर्ण बात कि हमें नारद जी जैसा गतिशील होना चाहिए। इससे हमारी प्रमाणिकता बढ़ेगी और हम अपनी दृष्टि से तथ्यों को देख पाएंगे। नारद जी जैसा निर्भीक और विश्वसनीय भी हम पत्रकारों को होना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि बस्तर के सामने कई चुनौतियां हैं। हमें विभाजनकारी शक्तियों को पहचानकर उनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आज कई पत्रकार पूवर्ती गांव जाकर खूंखार नक्सली हिड़मा और उसके परिवार को ग्लोरीफाई कर रहे हैं, लेकिन कितने पत्रकार बस्तर में शहीद हुए पुलिस या सीआरपीएफ जवानों के घर तक पहुंचे? हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। प्रियंका कौशल ने कहा कि बस्तर के पत्रकारों ने नक्सलवाद की समाप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खास तौर से सुकमा के पत्रकारों का योगदान नहीं भुलाया जा सकता। कई चुनौतियों का सामना करते हुए भी विपरीत स्थितियों में वे पत्रकारिता का धर्म निभाते रहे हैं। बस्तर के पत्रकारों ने अपनो को भी खोया, लेकिन अपने कर्त्तव्य से वे कभी पीछे नहीं हटे। बाक्स.... पत्रकारिता का वर्तमान दौर बहुत ही चुनौति पूर्ण: डीआईजी सीआरपीएफ के डीआईजी अरविंद सिंह राजपुरोहित ने कहा कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद क समाप्ति में मीडिया की भूमिका को नजर अंदाज नही किया जा सकता है। इसमें बड़ी भूमिका मीडिया की भी रही है जिसने आम जनता को जागरूक कर नक्सलियों के गलत विचारधारा को सावजनिक किया। श्री सिंह ने कहा कि पत्रकारिता का वर्तमान दौर बहुत ही चुनौति पूर्ण है और खबरों को लिखते व दिखाते वक्त तथ्यों को पूरा ध्यान दिया जाना चाहिऐ। साथ ही तथ्यात्मक व तथ्यों के आधार पर ही पत्रकारिता ज्यादा दिन तक टिकती है। उन्हेाने कहा कि पूरे विश्वास के साथ कह सकता हुं कि इस जिले के पत्रकार बहुत अच्छा कार्य कर रहे है। श्री सिंह ने कहा कि सुकमा में उनके कार्यकाल में पाया कि यहां के पत्रकारों ने हमेशा सकारात्मक पत्रकारिता करते हुए फोर्स की मदद की और कोई भी अप्रिय घटना घटित नही हुई।



